मिट्टी की फैक्ट्री


जिले में नए कलेक्टर साहब आए थे,वह आईआईटी से पढ़े थे और बड़े ही विद्वान थे,कलेक्टर साहब इतने बुद्धिमान थे कि जिस किताब को देखते उसे रट लेते, यदि कोई रात में सोते हुए भी उनसे पूछिए कि
what is rainbow
तो सोते सोते ही जवाब दे सकते थे
It is disprision of sun light By tiny rain drops,in the air is called rainbow
मतलब एप्टीट्यूट और अटिट्यूट दोनों की भरमार थी
जगह जगह लोगों को ज्ञान भी देते कि सफल कैसे हों,कुल मिलाकर बड़ी धाक जमा रखी थी

एक दिन मीटिंग में अचानक वह अपने अधिकारियों से बोले “मैंने पढ़ा है इस जिले की मिट्टी बड़ी अच्छी होती है, इस मिट्टी का सोर्स क्या है?, यह बनती कहां है? मुझे इसका उद्गम देखना है”

सभी अधिकारी एक दूसरे को देखने लगे, डर के कारण व सहम कर कुछ कह न सके, हालांकि जो वरिष्ठ अनुभवी लोग थे वह माजरा समझ गए, ऐसे ही अनुभवी अपर कलेक्टर साहब भी बड़े व्यवहारिक व्यक्ति थे, वह नायब तहसीलदार से प्रमोशन से अपर कलेक्टर तक पहुंचे थे, उन्होंने इससे पहले भी ऐसे अधिकारी देखे थे, उन्हें याद आया जब किसी जिले में वह एस डी एम थे तब एक किसान शिकायत करने आया जिसके हाथ में मूली थी उसे देखकर तत्कालीन कलेक्टर साहब वहां के अधिकारियों से बोले “अच्छा यह बताओ इस मूली का तना कहां है?”
और लाख समझाने के बाद भी कि यह मूली ही तना है वह कन्वेंस नहीं हुए और आखिर में दो पटवारियों को सस्पेंड कर ही उन्होंने दम लिया,क्योंकि उनकी नजर में पटवारी जमीन से जुड़े नहीं थे, ऐसा ही यह मामला था ऐसे ही यह अधिकारी दिख रहे थे

आखिर अपर कलेक्टर साहब ने बात सम्हालते हुए कहा, “साहब इस जिले में बीचों बीच जो तहसील पड़ती है उसमें ही कहीं इसका सोर्स होगा, अभी तहसीलदार और पटवारी से कहकर ढूंढवा लेते हैं और देखने चलते हैं,” कलेक्टर साहब ने कह दिया “ठीक है”
अपर कलेक्टर साहब ने एस डी एम से कहकर उस तहसील के कुछ पटवारी बुलवा लिए उन्हें अपने चैंबर में जाकर समझाया और कहा “घबराना मत जैसा मैं कहूं वैसा करते जाना,” आखिर में यही हुआ 4 पटवारियों की टीम कलेक्टर साहब के साथ भेजी गई, साथ मतलब साहब गाड़ी से थे तो यह भी तहसीलदार की गाड़ी में बैठ गए, अपर कलेक्टर साहब ने एस डी एम को समझा दिया था कि यदि कोई ऊंच नीच हो तो पटवारियों को मौके पर ही सस्पेंड कर साहब को वापस ले आना, और पटवारियों से कह दिया था “कि कुछ भी हो सकता है साहब गुस्सा हो तो जवाब मत देना बस सब सुनते रहना आखिर मैं सब देख लूंगा”
कलेक्टर साहब को एक गांव से दूर, खेतों के बीच में उतारा गया, वहां पटवारी ने जाकर मिट्टी हाथ में उठाई और कहा “साहब यही वो मिट्टी है जो पूरे शहर का पेट भरती है,”
“वाह यहां तो बहुत मिट्टी बनती है”
एक किसान बोला “नहीं सर यह तो होती ही है,”
“हां बनती है तभी तो होती है इन दोनों बातों में फर्क ही क्या है,” बीच में एस तहसीलदार ने बात सम्हाली
वह किसान भौंचक्का सा दोनों साहब को देखता रहा, उसी समय पटवारी ने आवाज लगाई
“सर उस तरफ देखिए वह गड्ढा है जहां से गांव के लोगों ने यह मिट्टी निकाली है,”
दूर एक कुंआ दिख रहा था कुछ मजदूर जिसको गहरा करने के लिए खुदाई कर रहे थे
कलेक्टर साहब वह गड्ढा देखकर खुश हो गए आज उन्हें मिट्टी का सोर्स समझ आ गया था ।
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