काम बाली बाई





******जैसे हो वैसे ही दिखो******
“दीदी सात दिन की छुट्टी चाहिए”
“सात दिन की!” चौंकते हुए मैडम ने अपनी काम बाली बाई प्रियंका को देखा
“जी सात दिन की, अपने हसबैंड के साथ घूमने जाना है मनाली,”
“यहां काम कौन करेगा सात दिन तक, और तुझे पता भी है कि कितना खर्चा होता है ऐसी जगह घूमने जाने में”

“उसकी क्या चिंता दीदी,आप तो हो न, दस दिन का एडवांस और टिकट का खर्चा तो आप हो दोगी न”
“मैं दूंगी! मुझे क्या पागल कुत्ते ने खा लिया है जो मैं इतना खर्चा करूंगी?”
“अरे दीदी आप से ही तो इतनी उम्मीद है,उससे पहले मैं जिनके यहां काम करती थी वह तो बड़े मतलबी थे, वह कभी किसी को कुछ देने की बात ही नहीं करते थे, वह कहते ‘मैं दिखावा नहीं कर पाता, मैं जैसा अंदर से हूं वैसा ही बाहर से,मुझसे नेताओं को तरह झूठे वादे नहीं होते’
इसलिए वह तो हमेशा मना कर देते थे, पर आप तो सामाजिक मुद्दों के लिए लड़ाई लड़ती हैं, आप महिलाओं की छुट्टी जैसे मैटरनिटी लीव लेती हैं और साल में कम से कम तीन बार सी सी एल(CCL) भी लेती हैं और आपकी सैलरी भी नहीं कटती तो मुझे पूरा भरोसा है आप हमारे लिए भी ऐसा ही करोगी,”
मैडम माथा पकड़ कर सोफे पर बैठ कर सुनती रहीं फिर बोली “और घूमने का खर्चा क्यों दूं”
“आप साहब के साथ एल टी सी(LTC) पर भी जाती हैं न, जहां अंडमान की फ्लाइट का टिकट का खर्चा सरकार देती है और आप 10 दिन का एडवांस भी लेती हैं ई एल(El) का,”
“यह सब तुझे कैसे पता,?”
आपके ऑफिस में मेरी एक सहेली आउटसोर्स पर काम करती है वह बता रही थी आप हमेशा महिलाओं की आवाज उठाती हैं और कहती हैं, ‘ अधिकार हम ले कर रहेंगे और जो नहीं देगा उसका जीना हराम देंगे,’ साथ ही यह भी बता रही थी कि आप महिला अधिकार को अधिकार नहीं जरूरत मानती हैं जो हर जगह होनी चाहिए तो मुझे उम्मीद थी कि शायद आप अंदर से पुराने वाले साहब जैसी ही ईमानदार होंगी जो जैसा दिखते व कहते थे वैसे ही थे”
मैडम चुप हो गई और काम बाली बाई से कहा ” कल से आने की जरूरत नहीं है” और ठेकेदार से कहा कल से दूसरी बाई भेज देना इसके भाव ज्यादा बढ़ गए हैं

मनीष भार्गव